रविवार, 1 मई 2011
सोमवार, 18 अप्रैल 2011
facebook देवो भव्
मैं और मुझ जैसे कई लोग आजकल भगवान के नाम के साथ साथ फेसबुक की महिमा का गुणगान भी करते है ,और करे भी क्यों नही.… अरे पहले जो मनोकामनाएं भगवान से कही जाती थी आजकल वह फेसबुक सुनता है और पूरी भी करता है
अब आप सब सोच रहे होंगे कौनसी ऐसी प्रार्थना फेसबुक सुनता है, तो आप ही सोचिये पहले अगर आपका कोई दोस्त आपसे बिछड़ जाता था तो आप या तो उसकी याद में हाथ मलते थे या प्रभु से मनाते थे कि कही भी वह आपको दोबारा मिल जाए और ये तो आपको भी पता है कि ये करिश्मे तो कभी कभी ही होते थे पर देखिये फेसबुक की कृपा से ये करिश्मे आपकी लाइफ में रोज होते होंगे ऐसे किसी दोस्त को याद कीजिये जिसका आपको बहुत दिन से अता पता नही है उसका नाम बस एफ बी पर क्लिक कीजिये और पता चल गया है न फेसबुक भगवन तुल्य |
और यही नही आपके देश दुनिया से नए नए दोस्त भी बनाता है , है न गजब चीज़ और आजकल तो और भी बहुत सी चीज़े एफ बी पर आ गयी है जैसे की आप अपनी कोई भी सार्वजानिक समस्या , अपराधिक शिकायत या सरकारी कार्यवाही की रिपोर्ट भी फेसबुक पर दे सकते है , और किसी भी आंदोलन को सफल भी बना सकते है जैसे कि अन्ना हजारे जी का साथ दिया लोगो ने...........
जिन लोगो की तस्वीरे आप सिर्फ टीवी और अखबारों में देखा करते थे या जिनके दर्शन आपने दूर से ही किये थे कभी आज वही यहाँ आपसे सीधे चैट करते है इसके आलावा यहाँ कुछ रिश्ते जुड़ते है तो कुछ टूटते भी है तो थोडा सा इस भगवन से डरना भी जरूरी होता है
अब तो आप मान गए कि फेसबुक भी आजकल भगवान सरीखा है क्योकि इसके पास वह शक्ति है जो साम दाम दंड से परिपूर्ण है.............................
गुरुवार, 31 मार्च 2011
पंचायत या फजीहत...........................................
'ज्यादा' आटा गूंध देती थी, पंचायत ने तुड़वा दी शादी
भदोही ।।पंचायत ने एक महिला को पति से अलग रहने का आदेश देते हुए कहा है कि उसका फैसला अंतिम है। पति ने शिकायत की थी कि वह महिला ज्यादा आटा गूंध देती है जिससे रोटियां बर्बाद होती हैं।
छोरियां नही रख सकती मोबाइल, जींस पर भी बंदिश................
मुजफ्फरनगर || गाँव की पंचायत ने सुनाया फैसला .... लड़कियों की आजादी पर लगाया पहरा..
फरमान .... पत्नी कहे पति को भाई..................
मुजफ्फरनगर || शादी होने के बाद पता चला की लड़के और लड़की की माओं का गोत्र समान है तो पंचायत ने कहा की दोनों भाई बहन है और शादी अमान्य है............................
ये कुछ उदाहरण है हमारे देश में मौजूद पंचायत के अस्तित्व और उसके तुगलकी फरमान के
पहली नजर में इन्हें पढ़कर हँसी आती है पर अगर एक बात सोचे तो हमारे समाज में आज भी पंचायत का राज चलता है , तभी तो लोग पंचो के पास जाते है और हमारे पञ्च परमेश्वर कुछ मिनटों में फैसला सुना देते है.....
अगर गौर किया जाए तो अधिकतर मामलो में पंचायत का फैसला पक्षपाती और हास्यास्पद होता है
एक समय था जब लोग बड़े बड़े मामलो में भी पंचो के पास जाते थे और पञ्च सभी तथ्यों पर गौर करके सटीक निर्णय देते थे .लोग पंचो को श्रद्धा और सम्मान की नजरो से देखते थे .............
पर समय के साथ पंचायती तरीका भी बदल गया ... न्याय की जगह तानाशाही ने ले ली
आज बिना सोचे समझे पंचायत ऐसे फरमान देती है की दया आती है पंचो पर और उन लोगो पर जो उनके पास न्याय मांगने जाते है ..
पर अगर देखा जाए तो ये हमारे न्याय तंत्र की ही खामी है हमारे देश की अदालतों में इतने मुकदमे लंबित है की अगर लोग अदालत जाए तो उन्हें सालो अपनी बारी का इन्तजार में गुजर जाते है............. सो किसी कानूनी मामले में भी लोग पंचो के पास सिर्फ इसलिए जाते है की वहाँ मामला मिनटों में निपट जाता है और मामले कैसे निपटाए जाते है एक बानगी तो देखिये .........
बलात्कारी को ५० जूतों की सजा
चोरी के आरोपी बच्चे को खूंटे से बांध कर पीटा ..
इन दोनों खबरों में पंचायत के लापरवाह और तानाशाह व्यवहार की ही झलक मिलती है
वैसे तो सदियों से समाज की व्यवस्था सही रखने की जिम्मेदारी पञ्च निभाते चले आये है पर समय के साथ सोच भी थोड़ी बदल जानी चाहिये लेकिन पंचो की सोच आज भी १०० साल पहले ही अटकी हुई है और इसी के साथ अटक जाती है आजकल के युवाओं की सांस ....
इज्ज़त के नाम पर मनोज और बबली जैसे पता नही कितने नौजवान समाज की भेंट चढ़ गए और उनके हत्यारों को यही पंचायते निर्दोष करार दे कर साफ़ बचा ले जाती है...
भूलवश समगोत्री शादी हो जाये तो शादी के बाद भी पति पत्नी भाई बहन ही होते है पंचायतो के अनुसार...
ये तो सिर्फ कुछ बाते है जिनसे न सिर्फ पंचायतो की साख गिरी बल्कि वो समाज की अपराधी भी बन रही है पंचायत को अपने छवि सुधार की अत्यंत आवश्यकता है क्योकि कुछ भी हो पंचायतो का एक गौरवशाली इतिहास रहा है अपने देश में ....................................
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